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रेल में यात्रा करने वाले लोगों के लिए इंडियन रेलवे ने नया नियम लागू कर दिया है। इस नियम के अनुसार ट्रेन का टिकल खरिदते समय यात्रियों को नागरिकता भी बतानी होगी।

भारत के लोगों को सिर्फ भारतीय लिखना होगा वहीं अन्य देशों के लोगों को पासपोर्ट नंबर या फिर देश का कोड नंबर भी दर्ज कराना होगा। ट्रेन के यात्री चार्ट में भी इसका असर दिखेगा। चार्ट में यह दर्ज किया जाएगा कि किस-किस देश के नागरिक ट्रेन में सफर कर रहे हैं। इंडियन रेलवे ने इस नियम को तत्काल प्रभाव से इसे लागू कर दिया है।

होंगे बड़े फायदे

देश की नागरिकता का टिकट के साथ रजिस्टर्ड हो जाने से रेलवे को यह पता लगाने में आसानी होगी कि किस रूट पर सबसे ज्यादा विदेशी ट्रैवल करते हैं। इसके आधार पर उस जगह की पहचान कर उसके आस-पास सुविधाएं उपलब्ध कराया जा सकेगा। जिससे इंडियन टूरिज्म को फायदा मिल सके। देश की सुरक्षा में भी इससे मदद मिलेगी। किसी पर शक होने पर उसका पासपोर्ट नंबर सर्वर पर डालकर उसके बारे में पूरी जानकारी निकाली जा सकेगी।

यात्रियों को ट्रेनों पर भोजन के व्यापक विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रेलवे ने उनके लिए 'रेडी-टु-ईट' खाद्य वस्तुएं पेश की हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जहां चुनिंदा ट्रेनों और स्टेशनों पर ई-कैटरिंग सेवा शुरू की गई है, यात्रियों के पास अब ‘रेडी-टु-ईट’ खाद्य पदार्थों का भी विकल्प होगा।

उसने कहा कि 'रेडी-टु-ईट' खाद्य वस्तुओं पर दिशानिर्देश सभी मंडलों को जारी किया जा चुका है जहां भोजनयान वाली मेल.एक्सप्रेस ट्रेनों को यात्रियों को 'रेडी-टु-ईट' खाद्य पदार्थ परोसने का विकल्प जोड़ने को कहा गया है। यात्रियों को साफ सुथरा और अच्छी गुणवत्ता का खाद्य पदार्थ परोसा जाय, यह सुनिश्चित करने के लिए सेवा में कमी के मामले में दंड के प्रावधान किए गए हैं।

उत्तर पश्चिम रेलवे ने 'रेडी-टु-ईट' खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए चार प्रतिष्ठित कंपनियों- गितवाको फाम्र्स, बीटीडब्ल्यू इंडिया, गिट्स फूड प्रोडक्ट्स और आर्यन फूड प्रोडक्ट्स को पैनल में शामिल किया है। ई-कैटरिंग सेवा वर्तमान में ऐसी 1,350 ट्रेनों में उपलब्ध है जिनमें भोजनयान नहीं हैं। यह देशभर में 45 स्टेशनों पर उपलब्ध है।

यात्रियों को अच्छी गुणवत्ता का खाद्य उपलब्ध कराने के लिए केएफसी, डोमिनोज, हल्दीराम, बिट्टू टिक्की वाला, फूड पांडा जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों को वेंडर-एग्रिगेटर के तौर पर पहले ही पैनल में शामिल किया जा चुका है। वहीं शिकायत या सुझाव दर्ज कराने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर 138 भी शुरू किया गया है।

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